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शान्ति पर्व
अध्याय १०९
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भीष्म उवाच
विद्यां श्रुत्वा ये गुरुं नाद्रिय़न्ते; प्रत्यासन्नं मनसा कर्मणा वा |  २०   क
यथैव ते गुरुभिर्भावनीय़ा; स्तथा तेषां गुरवोऽप्यर्चनीय़ाः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति