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अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
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अङ्गिरा उवाच
पञ्चम्यां चैव षष्ठ्यां च पौर्णमास्यां च भारत |  १४   क
क्षमावान्रूपसम्पन्नः श्रुतवांश्चैव जाय़ते ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति