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अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
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अङ्गिरा उवाच
पूर्णं वर्षसहस्रं तु व्रह्मलोके महीय़ते |  ३७   क
तत्क्षय़ादिह चागम्य माहात्म्यं प्रतिपद्यते ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति