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अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
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अङ्गिरा उवाच
यस्तु संवत्सरं पूर्णमेकाहारो भवेन्नरः |  ३८   क
अतिरात्रस्य यज्ञस्य स फलं समुपाश्नुते ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति