menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
chevron_left
chevron_right
अङ्गिरा उवाच
वाजपेय़स्य यज्ञस्य फलं वै समुपाश्नुते |  ४१   क
त्रिंशद्वर्षसहस्राणि स्वर्गे च स महीय़ते ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति