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भीष्म पर्व
अध्याय ८२
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सञ्जय़ उवाच
यमावपि सुसङ्क्रुद्धः समासाद्य रणे तदा |  १३   क
शरैः सञ्छादय़ामास भीष्मः परपुरञ्जय़ः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति