अनुशासन पर्व  अध्याय १०९

अङ्गिरा उवाच

पताकादीपिकाकीर्णे दिव्यघण्टानिनादिते |  ६०   क
स्त्रीसहस्रानुचरिते स नरः सुखमेधते ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति