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वन पर्व
अध्याय २९६
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वैशम्पाय़न उवाच
तान्दृष्ट्वा दुःखितो भीमस्तृषय़ा च प्रपीडितः |  ३५   क
अमन्यत महावाहुः कर्म तद्यक्षरक्षसाम् |  ३५   ख
स चिन्तय़ामास तदा योद्धव्यं ध्रुवमद्य मे ||  ३५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति