उद्योग पर्व  अध्याय १०९

सुपर्ण उवाच

अत्र विष्णुपदं नाम क्रमता विष्णुना कृतम् |  १९   क
त्रिलोकविक्रमे व्रह्मन्नुत्तरां दिशमाश्रितम् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति