उद्योग पर्व  अध्याय १०९

सुपर्ण उवाच

एवमेषा द्विजश्रेष्ठ गुणैरन्यैर्दिगुत्तरा |  २४   क
उत्तरेति परिख्याता सर्वकर्मसु चोत्तरा ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति