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उद्योग पर्व
अध्याय १०९
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सुपर्ण उवाच
अत्र नाराय़णः कृष्णो जिष्णुश्चैव नरोत्तमः |  ४   क
वदर्यामाश्रमपदे तथा व्रह्मा च शाश्वतः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति