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भीष्म पर्व
अध्याय १०९
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सञ्जय़ उवाच
अत्यद्भुतं रणे कर्म कृतवांस्तत्र पाण्डवः |  १७   क
महारथाञ्शरैर्विद्ध्वा वारय़ित्वा महारथः |  १७   ख
विरथं सैन्धवं चक्रे सर्वलोकस्य पश्यतः ||  १७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति