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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
महाभारतय़ुद्धे यत्त्वय़ा शान्तनवो नृपः |  ८   क
अधर्मेण हतः पार्थ तस्यैषा निष्कृतिः कृता ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति