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भीष्म पर्व
अध्याय १०९
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सञ्जय़ उवाच
ते चापि रथिनां श्रेष्ठा भीमाय़ निशिताञ्शरान् |  ३३   क
प्रेषय़ामासुरव्यग्राः शतशोऽथ सहस्रशः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति