menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
कच्चित्ते वर्धते राजंस्तपो मन्दश्रमस्य ते |  ११   क
अपि मे जननी चेय़ं शुश्रूषुर्विगतक्लमा |  ११   ख
अप्यस्याः सफलो राजन्वनवासो भविष्यति ||  ११   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति