menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततो रथसहस्रेण गजानां च शतैस्त्रिभिः |  ४९   क
वाजिभिः पञ्चसाहस्रैस्त्रिसाहस्रैः प्रभद्रकैः |  ४९   ख
वृतः शिखण्डी त्वरितो राजानं पृष्ठतोऽन्वय़ात् ||  ४९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति