आदि पर्व  अध्याय ११

डुण्डुभ उवाच

व्राह्मणः सौम्य एवेह जाय़तेति परा श्रुतिः |  १३   क
वेदवेदाङ्गवित्तात सर्वभूताभय़प्रदः ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति