menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २२३
chevron_left
chevron_right
द्रौपद्यु उवाच
इमं तु ते मार्गमपेतदोषं; वक्ष्यामि चित्तग्रहणाय़ भर्तुः |  १   क
यस्मिन्यथावत्सखि वर्तमाना; भर्तारमाच्छेत्स्यसि कामिनीभ्यः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति