शान्ति पर्व  अध्याय ४९

वासुदेव उवाच

जमदग्निधेन्वास्ते वत्समानिन्युर्भरतर्षभ |  ४०   क
अज्ञातं कार्तवीर्यस्य हैहय़ेन्द्रस्य धीमतः ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति