वन पर्व  अध्याय १५

कृष्ण उवाच

उक्तवांश्च महावाहो क्वासौ वृष्णिकुलाधमः |  ८   क
वासुदेवः सुमन्दात्मा वसुदेवसुतो गतः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति