सभा पर्व  अध्याय ११

नारद उवाच

अप्रमेय़प्रभां दिव्यां मानसीं भरतर्षभ |  ३   क
अनिर्देश्यां प्रभावेन सर्वभूतमनोरमाम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति