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सभा पर्व
अध्याय ११
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युधिष्ठिर उवाच
किमुक्तवांश्च भगवन्नेतदिच्छामि वेदितुम् |  ५१   क
त्वत्तः श्रोतुमहं सर्वं परं कौतूहलं हि मे ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति