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उद्योग पर्व
अध्याय ४९
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सञ्जय़ उवाच
राज्ञो मुखमुदीक्षन्ते पाञ्चालाः पाण्डवैः सह |  ४   क
युधिष्ठिरस्य भद्रं ते स सर्वाननुशास्ति च ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति