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वन पर्व
अध्याय ११
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वैशम्पाय़न उवाच
इत्येवमुक्ते वचने धृतराष्ट्रो महीपतिः |  ३५   क
प्रसादय़ामास मुनिं नैतदेवं भवेदिति ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति