उद्योग पर्व  अध्याय १३७

द्रोण उवाच

यस्य लोके समो नास्ति कश्चिदन्यो धनुर्धरः |  ६   क
मत्प्रसादात्स वीभत्सुः श्रेय़ानन्यैर्धनुर्धरैः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति