उद्योग पर्व  अध्याय ११

शल्य उवाच

स तां सन्दृश्य दुष्टात्मा प्राह सर्वान्सभासदः |  १४   क
इन्द्रस्य महिषी देवी कस्मान्मां नोपतिष्ठति ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति