उद्योग पर्व  अध्याय ११

शल्य उवाच

तच्छ्रुत्वा दुर्मना देवी वृहस्पतिमुवाच ह |  १६   क
रक्ष मां नहुषाद्व्रह्मंस्तवास्मि शरणं गता ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति