उद्योग पर्व  अध्याय ११

शल्य उवाच

अथ शुश्राव नहुष इन्द्राणीं शरणं गताम् |  २२   क
वृहस्पतेरङ्गिरसश्चुक्रोध स नृपस्तदा ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति