उद्योग पर्व  अध्याय ११

शल्य उवाच

धर्मं पुरस्कृत्य सदा सर्वलोकाधिपो भव |  ७   क
व्रह्मर्षींश्चापि देवांश्च गोपाय़स्व त्रिविष्टपे ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति