विराट पर्व  अध्याय ४४

कृप उवाच

तथा निवातकवचाः कालखञ्जाश्च दानवाः |  ९   क
दैवतैरप्यवध्यास्ते एकेन युधि पातिताः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति