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कर्ण पर्व
अध्याय ५७
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कर्ण उवाच
तथेन्द्रलोके निजघान दैत्या; नसङ्ख्येय़ान्कालकेय़ांश्च सर्वान् |  ४३   क
लेभे शङ्खं देवदत्तं स्म तत्र; को नाम तेनाभ्यधिकः पृथिव्याम् ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति