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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
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अहल्यो उवाच
गौतमस्त्वव्रवीत्पत्नीमुत्तङ्को नाद्य दृश्यते |  ३२   क
इति पृष्टा तमाचष्ट कुण्डलार्थं गतं तु वै ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति