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द्रोण पर्व
अध्याय ११
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सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेषु हि सापेक्षं द्रोणं जानाति ते सुतः |  ३०   क
ततः प्रतिज्ञास्थैर्यार्थं स मन्त्रो वहुलीकृतः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति