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वन पर्व
अध्याय २३८
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दुर्योधन उवाच
व्राह्मणाः श्रेणिमुख्याश्च तथोदासीनवृत्तय़ः |  १५   क
किं मां वक्ष्यन्ति किं चापि प्रतिवक्ष्यामि तानहम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति