शान्ति पर्व  अध्याय २९३

वसिष्ठ उवाच

पुमांश्चैवापुमांश्चैव त्रैलिङ्ग्यं प्राकृतं स्मृतम् |  ३६   क
नैव पुमान्पुमांश्चैव स लिङ्गीत्यभिधीय़ते ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति