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कर्ण पर्व
अध्याय ११
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सञ्जय़ उवाच
ते वाणाः समसज्जन्त क्षिप्तास्ताभ्यां तु भारत |  २४   क
द्योतय़न्तो दिशः सर्वास्तच्च सैन्यं समन्ततः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति