भीष्म पर्व  अध्याय १५

धृतराष्ट्र उवाच

प्रज्ञा पराय़णं तज्ज्ञं सद्धर्मनिरतं शुचिम् |  ४०   क
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञं कथं शंससि मे हतम् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति