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शल्य पर्व
अध्याय ११
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सञ्जय़ उवाच
नानारूपाणि शस्त्राणि विसृजन्तो महारथाः |  ४५   क
अन्योन्यमभिगर्जन्तः प्रहरन्तः परस्परम् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति