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शल्य पर्व
अध्याय ११
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सञ्जय़ उवाच
प्रेक्षन्तः सर्वतस्तौ हि योधा योधमहाद्विपौ |  ५   क
तावकाश्च परे चैव साधु साध्वित्यथाव्रुवन् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति