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अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
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भीष्म उवाच
सप्तानां मरुतां लोकान्वसूनां चापि सोऽश्नुते |  १०५   क
विमाने स्फाटिके दिव्ये सर्वरत्नैरलङ्कृते ||  १०५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति