शान्ति पर्व  अध्याय ३०८

भीष्म उवाच

सा प्राप्य मिथिलां रम्यां समृद्धजनसङ्कुलाम् |  १२   क
भैक्षचर्यापदेशेन ददर्श मिथिलेश्वरम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति