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अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
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भीष्म उवाच
दिवं गत्वा शरीरेण स्वेन राजन्यथामरः |  १३३   क
स्वर्गं पुण्यं यथाकाममुपभुङ्क्ते यथाविधि ||  १३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति