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भीष्म पर्व
अध्याय ४०
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श्रीभगवानु उवाच
व्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति |  ५४   क
समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम् ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति