अनुशासन पर्व  अध्याय ११०

भीष्म उवाच

अमांसाशी व्रह्मचारी सर्वभूतहिते रतः |  ८५   क
स लोकान्विपुलान्दिव्यानादित्यानामुपाश्नुते ||  ८५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति