वन पर्व  अध्याय ११०

लोमश उवाच

एषा देवनदी पुण्या कौशिकी भरतर्षभ |  १   क
विश्वामित्राश्रमो रम्य एष चात्र प्रकाशते ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति