उद्योग पर्व  अध्याय ११०

गालव उवाच

गरुत्मन्भुजगेन्द्रारे सुपर्ण विनतात्मज |  १   क
नय़ मां तार्क्ष्य पूर्वेण यत्र धर्मस्य चक्षुषी ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति