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उद्योग पर्व
अध्याय १५२
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वैशम्पाय़न उवाच
रथस्य नागाः पञ्चाशन्नागस्यासञ्शतं हय़ाः |  २०   क
हय़स्य पुरुषाः सप्त भिन्नसन्धानकारिणः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति