शान्ति पर्व  अध्याय २८१

पराशर उवाच

रन्तिदेवेन लोकेष्टा सिद्धिः प्राप्ता महात्मना |  ७   क
फलपत्रैरथो मूलैर्मुनीनर्चितवानसौ ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति