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वन पर्व
अध्याय २५५
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वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्तौ तौ नरव्याघ्रौ यय़तुर्यत्र सैन्धवः |  ४७   क
राजा निववृते कृष्णामादाय़ सपुरोहितः ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति