आदि पर्व  अध्याय ११३

पाण्डुरु उवाच

अद्यैव त्वं वरारोहे प्रय़तस्व यथाविधि |  ३९   क
धर्ममावाहय़ शुभे स हि देवेषु पुण्यभाक् ||  ३९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति